4.70 प्रतिशत की विकास दर हासिल की डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री ने...


4.70 प्रतिशत की विकास दर हासिल की डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री ने...


नई दिल्ली । कोरोना काल के दौरान देश में आर्थिक गतिविधियों के पहिए भले ही धीमे पड़ गये हों, लेकिन कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जिनमें, विकास की गति पहले से भी तेज हो गई है। ऐसा ही एक क्षेत्र डायरेक्ट सेलिंग का भी है। आर्थिक तंगी के इस दौर में डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री की विकास दर 4.70 फीसदी की रही। इस दौरान वैलनेस श्रेणी की वस्तुओं का कारोबार तो 20 फ़ीसदी से भी ज्यादा तेज गति से बढ़ा।
            

देश में डायरेक्ट सेलिंग कारोबार को लेकर जुलाई से सितंबर की तिमाही खूब बेहतर रही

देश में डायरेक्ट सेलिंग क्षेत्र की सभी प्रमुख कंपनियों के मुख्य संगठन इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (IDSA) ने डायरेक्ट सेलिंग कारोबार पर कोरोना काल के उक्त प्रभावों को लेकर हाल ही में एक सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण के अनुसार दरअसल क्षेत्र में चालू वित्त वर्ष की प्रथम छमाही के दौरान गत वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 4.70 फीसदी की विकास दर हासिल की । चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में हालांकि यह क्षेत्र भी कोरोना को लेकर लगे लॉकडाउन की मार से अछूता नहीं रहा, लेकिन दूसरी तरफ इस तिमाही में इसने कारोबार में ऊंची छलांग लगाई। इस दौरान इसकी विकास दर इन तिमाहियों में क्रमशः 0.90 फ़ीसदी और 0.92 फीसदी रही। इस दौरान लगभग 50 लाख से भी ज्यादा डायरेक्ट सेलर और उपभोक्ता भी डायरेक्ट सेलिंग व्यापार से जुड़े।

बड़़ी संख्या में डायरेक्ट सेलर्स जुड़े

आईडीएसए की चेयर पर्सन रिनी सान्याल के अनुसार कोरोना काल में जहां अधिकतर उद्योगों और कारोबारी क्षेत्रों को मंदी की मार झेलनी पड़ी, वही डायरेक्ट सेलिंग क्षेत्र चालू वित्त वर्ष की प्रथम दो तिमाहियों के दौरान अपनी बिक्री में वृद्धि दर हासिल करने में सफल रहा। इस दौरान अपेक्षाकृत बड़ी संख्या में डायरेक्ट सेलर क्षेत्र के साथ जुड़े जिन्होंने इसे पूर्णकालिक या आमदनी में वृद्धि के लिए कैरियर के रूप में अपनाया। सर्वेक्षण के अनुसार चालू वित्त वर्ष के प्रथम छ:माही में डायरेक्ट सेलिंग क्षेत्र का कारोबार गत वर्ष की इसी अवधि के 7200 करोड़ के मुकाबले 7500 करोड़ रुपए को पार कर गया।



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