जिसे जिंदगी में आगे बढ़ना है... जरूर पढ़ें!
एक रेल सफर में भीख मांगने के दौरान एक भिखारी को सूट-बूट पहने एक सेठ जी दिखे! उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत अमीर लगता है क्यों ना इससे भीख मांगने पर यह मुझे जरूर अच्छे पैसे देगा! वह उस सेठ जी से भीख मांगने लगा!
भिखारी को उस सेठ ने देखकर कहा कि तुम हमेशा मांगते ही हो क्या?..... या कभी किसी को कुछ देते भी हो! भिखारी बोला- साहब मैं तो भिखारी हूं! हमेशा लोगों से मांगता ही रहता हूं! मेरी इतनी औकात कहां कि मैं किसी को कुछ दे सकूं! सेठ जी बोले- जब तुम किसी को कुछ दे नहीं सकते तो मांगने का भी तुम्हें कोई हक नहीं! मैं एक व्यापारी हूं और लेन-देन में ही विश्वास रखता हूं अगर तुम्हारे पास मुझे कुछ देने को हो तभी मैं तुम्हें बदले में कुछ दे सकता हूं! तभी वह स्टेशन आ गया! जहां उन सेठ जी को उतरना था! सेठ जी ट्रेन से उतरा और चला गया! इधर भिखारी सेठ जी की उस बात के बारे में सोचने लगा! सेठ की कही गई बात भिखारी के दिल में उतर गई! वह सोचने लगा कि शायद मुझे भीख में अधिक पैसे इसलिए नहीं मिलते क्योंकि मैं बदले में किसी को कुछ दे नहीं पाता! लेकिन मैं तो भिखारी हूं और दे भी क्या सकता हूं! लेकिन कब तक मैं लोगों को कुछ दिए बिना मांगता ही रहूंगा! बहुत सोचने के बाद भिखारी ने निर्णय लिया कि जो भी व्यक्ति उसे भीख देगा उसके बदले में वह भी उस व्यक्ति को कुछ ना कुछ जरूर देगा! लेकिन अब उसके दिमाग में यह प्रश्न भी चल रहा था कि वह खुद भिखारी है और भीख के बदले में वह दूसरों को क्या दे सकता है? इस बात को सोचते हुए दिन गुजर गया लेकिन उसे अपने प्रश्न का कोई उत्तर नहीं मिला! दूसरे दिन जब वह स्टेशन के पास बैठा हुआ था तभी उसकी नजर स्टेशन पर कुछ फूलों पर पड़ी जो स्टेशन पर आसपास के पौधों पर खिल रहे थे उसने सोचा कि क्यों ना लोगों को भीख के बदले कुछ फूल दे दिया करूं! उसे अपना यह विचार अच्छा लगा और उसने वहां से कुछ फूल तोड़ लिए और ट्रेन में भीख मांगने पहुंचा! उसके बाद जब भी कोई उसे भीख देता तो वह भीख के बदले सामने वाले को कुछ फूल देता! उन फूलों को लेकर लोग खुश होकर अपने पास रख लेते और भिखारी रोज फूल तोड़ता और रोज उन फूलों को भीख के बदले उन लोगों में बांट देता था! कुछ दिनों में उसने महसूस किया कि अब पहले से ज्यादा लोग उसे भीख देने लगे थे! वो स्टेशन के पास के सभी फूलों को तोड़ लाता था जब तक उसके पास फूल रहते तब तक उसे भीख के रूप में अच्छा पैसा मिलता लेकिन फूल बांटते बांटते खत्म हो जाते तो उसे भीख नहीं मिलती थी! अब रोज ऐसा ही चलता रहता था लेकिन एक दिन जब वह भीख मांग रहा था तो उसने देखा वही सेठ जी उस ट्रेन में बैठे हैं जिसकी वजह से उसे भीख लेने के बदले फूल देने की प्रेरणा मिली थी! वह तुरंत उस व्यक्ति के पास पहुंच गया और भीख मांगते हुए बोला कि आज मेरे पास आपको देने के लिए कुछ फूल है! आप मुझे भीख दीजिए बदले में मैं आपको कुछ फूल दे दूंगा! सेठ ने उसे भीख के रूप में कुछ पैसे दे दिए और बदले में भिखारी ने कुछ फूल उन्हें दे दिए! उस सेट को यह बात बहुत पसंद आयी! सेठ जी ने "वाह क्या बात है" कहकर उसकी तारीफ करी और कहा कि आज तुम भी मेरी तरह एक व्यापारी बन गए हो! इतना कहकर वह सेठ जी फूल लेकर स्टेशन पर उतर गए लेकिन उस सेठ जी द्वारा कही गई बात एक बार फिर से उस भिखारी के दिल में उतर गई! वह बार-बार उस सेट जी के द्वारा कही गई उस बात के बारे में सोचने लगा और बहुत खुश होने लगा! उसकी आंखें अब चमकने लगी थी! उसे लगने लगा था कि अब उसके हाथ सफलता की वो चाबी भी लग गई है जिसके द्वारा वह अपने जीवन को बदल सकता है! वह तुरंत ट्रेन से नीचे उतरा और उत्साहित होकर बहुत तेज आवाज में ऊपर आसमान की ओर देख कर बोला- मैं भिखारी नहीं हूं, मैं तो एक व्यापारी हूं! मैं भी उस सेठ जैसा बन सकता हूं! मैं भी अमीर बन सकता हूं! लोगों ने जब उसे देखा तो सोचा कि शायद भिखारी पागल हो गया है! उस दिन से वो भिखारी उस स्टेशन पर फिर कभी नहीं दिखा!
1 वर्ष बाद.... उसी स्टेशन पर दो व्यक्ति सूट-बूट पहने यात्रा करने आए! उन्होंने एक दूसरे को देखा तो उनमें से एक ने दूसरे से हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ आगे किया और कहा कि आपने मुझे पहचाना! दूसरे व्यक्ति ने उसका उत्तर "ना" में दिया और कहा कि शायद हम पहली बार ही मिल रहे हैं! पहले वाले व्यक्ति ने कहा- सेठ जी आप याद करिए क्योंकि हम पहली बार नहीं बल्कि तीसरी बार मिल रहे हैं! दूसरा व्यक्ति ने कहा- मुझे याद नहीं आ रहा और वैसे हम पहले दो बार कब और कहां मिले थे?? पहला व्यक्ति मुस्कुराया और बोला कि हम पहले भी दो बार इसी ट्रेन में मिले थे! मैं वही भिखारी हूं जिसको आपने पहली मुलाकात में बताया था कि मुझे जीवन में क्या करना चाहिए? और दूसरी मुलाकात में बताया कि मैं वास्तव में कौन हूं?
सेठ जी:- ओह याद आ गया तुम वही भिखारी हो जिसे मैंने एक बार भीख देने से मना कर दिया था और दूसरी बार मैंने तुमसे कुछ फूल खरीदे थे! आज तुम सूट बूट पहले कहां जा रहे हो? और आजकल तुम क्या कर रहे हो?
सेठ जी मैं वही भिखारी हूं लेकिन आजकल मैं फूलों का एक बहुत बड़ा व्यापारी हूं और इसी व्यापार के काम से दूसरे शहर जा रहा हूं! आपने मुझे पहली मुलाकात में प्रकृति का नियम बताया था जिसके अनुसार "हमें तभी कुछ मिलता है जब हम कुछ दूसरों को देते हैं" लेन-देन का यह नियम वास्तव में काम करता है मैंने इसे बहुत अच्छी तरह महसूस किया है लेकिन मैं खुद को हमेशा एक भिखारी समझता रहा इससे ऊपर उठकर मैंने कभी सोचा ही नहीं था लेकिन जब आपसे मेरी दूसरी मुलाकात हुई तब आपने मुझे बताया कि मैं एक व्यापारी बन चुका हूं! अब मैं समझ चुका था कि मैं वास्तव में एक भिखारी नहीं बल्कि एक व्यापारी बन चुका हूं! मैंने समझ लिया था कि लोग मुझे इतनी भी क्यों दे रहे थे? क्योंकि वह मुझे भीख नहीं दे रहे थे बल्कि उन फूलों का मूल्य दे चुका रहे थे बल्कि सभी लोग मेरे फूल खरीद रहे थे क्योंकि इससे सस्ते फूल उन्हें कहां मिलते हैं? मैं लोगों की नजरों में एक छोटा व्यापारी था लेकिन मैं अपनी नजरों में एक भिखारी था! आपके बताने पर मुझे समझ आ गया था कि मैं छोटा व्यापारी हूं! मैंने ट्रेन में फूल बांटने से जो पैसे इकट्ठे किए थे उनसे बहुत से फूल खरीदें और फूलों का व्यापारी बन गया! यहां के लोगों को फूल बहुत पसंद है और उनकी इस पसंद ने आज मुझे फूलों का एक बहुत बड़ा व्यापारी बना दिया! स्टेशन आने पर वह साथ साथ उतरे और अपने अपने व्यापार की बात करते हुए आगे बढ़ गए!
दोस्तों दुनिया के सभी बड़े व्यापारी हो या पूंजीपति इस नियम का पालन करते हुए बड़े हुए हैं! अगर आपको भी अपने फील्ड में कामयाब होना है तो हमेशा इस "दो" और "लो" के सिद्धांत को अपनायें!!!
"अगर आप किसी को अच्छा देंगे...... तो निश्चित ही आप भी अच्छे के हकदार होंगे"
