नेटवर्क मार्केटिंग में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रकृति से सीखें ये 5 बातें...
दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग के माध्यम से आपसे "प्रकृति" और "मनुष्य" के एक अलग ही रिलेशनशिप के बारे में बात करने जा रहे हैं वह रिलेशन है टीचर और स्टूडेंट का... जी हां प्रकृति ही हमारी सबसे बड़ी टीचर है जो यह हमें हर पल कुछ न कुछ सिखाती रहती है बस जरूरत है थोड़ा ध्यान देने की....
आज तक मनुष्य ने जो भी हासिल किया है वह प्रकृति से सीख कर और प्रकृति से लेकर ही किया है! न्यूटन को ग्रेविटी का पाठ प्रकृति ने हीं सिखाया है..... यही नहीं इस धरती पर कई बहुत से अविष्कार भी प्रकृति से प्रेरित होकर ही हुए हैं इन सबके अलावा प्रकृति हमें ऐसे गुण भी सिखाती है जिससे हम अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं और इससे जिन्दगी में बेहतर बन सकते हैं! वैसे इसकी लिस्ट तो बहुत लंबी हो सकती है लेकिन यहां हम आपको ऐसी ही मूल्यवान पांच चीजों के बारे में बताने जा रहे है जो हम प्रकृति से भली-भांति सीख सकते हैं:-
पतझड़ का मतलब पेड़ का अंत नहीं होता...
कभी-कभी हमारे साथ कुछ ऐसा घटित हो जाता है जिससे हम अपने आप को बहुत थका हुआ महसूस करने लगते हैं! ऐसा लगता है जैसे अब हमारा सब कुछ खत्म हो गया है जिससे अधिकतर लोग डिप्रेशन में भी चले जाते हैं और जिसके चलते कई लोग बड़ा और बेवकूफी भरा कदम उठा लेते हैं
जरा सोचिए पतझड़ के समय जब पेड़ पर एक भी पत्ती नहीं बचती तो क्या उस पेड़ का अंत हो जाता है? नहीं ना! बल्कि वह पेड़ कभी हार नहीं मानता, नए जीवन और बहार की आस में खड़ा रहता है और जल्द ही उसमें नई पत्तियां आनी शुरू हो जाती है! उसके जीवन में फिर से बहार आ जाती है! यही प्रकृति का नियम है! ठीक ऐसे ही अगर हमारे जीवन में कुछ ऐसे ही डिस्ट्रक्टिव पल आते हैं तो इसका मतलब अंत नहीं बल्कि इस बात का इशारा है कि हमारे जीवन में भी नहीं बाहर आएगी इसलिए हमें सब कुछ भूल कर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करनी चाहिए और यह विश्वास रखना चाहिए कि नई जिंदगी पुरानी से कहीं ज्यादा बेहतर होगी
कमल कीचड़ में भी रहकर अपनी अलग पहचान बनाता है
यही बात हमें बुराई के बीच रहकर भी अच्छा करने के लिए प्रेरित करती है जिस तरह कमल कीचड़ में रहकर भी अपने अंदर कीचड़ वाले गुण विकसित नहीं होने देता है उसी तरह हमारे आसपास भी चाहे कितनी भी बुराइयां हो उन्हें अपने अंदर पनपने नहीं देना चाहिए हमें अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए
नदी का बहाव ऊंचाई से नीचे की ओर होता है
जिस तरह से नदी में पानी का भाव ऊंचे लेवल से नीचे लेवल की ओर होता है उसी तरह हमारी जिंदगी में भी प्रेम भाव का प्रवाह बड़े से छोटे की ओर होता है इसलिए हमें कभी भी अपने आपको दूसरों के सामने ज्ञानवान या बड़ा बताने की जरूरत नहीं है और इससे कोई फायदा भी तो नहीं है उल्टा प्रेम भाव हम तक बह कर नहीं आएगा
ऊंचे पर्वतों पर आवाज का परिवर्तन
जब कोई पर्वत की ऊंची चोटी से जोर से आवाज लगाता है तो वहीं आवाज वापस लौटकर उसी को सुनाई देती है विज्ञान में इस घटना को ECHO कहते हैं पर यही नियम हमारे जीवन में भी लागू होता है हम वही पाते हैं जो हम दूसरों को देते हैं हम जैसा व्यवहार दूसरों के लिए करते हैं वही हमें वापस मिलता है यदि हम दूसरों का सम्मान करते हैं तो हमें भी सम्मान मिलेगा और यदि हम दूसरों के बारे में गलत बात रखते हैं तो वह वापस हमें ही मिलता है इसलिए हम जैसा व्यवहार करें याद रखें वह लौटकर वापस हमको ही मिलने वाला है
छोटे पौधों की तुलना में विशाल पेड़ को तैयार होने में ज्यादा वक्त लगता है
जिस तरह विशाल पेड़ को तैयार होने में ज्यादा वक्त लगता है उसी तरह हमारे महान लक्ष्यों को पूरा होने में भी ज्यादा वक्त लगता है लेकिन कुछ लोग धैर्य नहीं रख पाते और अपना काम बीच में ही छोड़ देते हैं ऐसा करने वाले लोगों को बाद में पछतावा ही मिलता है क्योंकि बड़े लक्ष्यों में सफलता के लिए कड़ी मेहनत के अलावा धैर्य की भी आवश्यकता होती है
"Always Be Positive"
"Always Be Dream Chaser"
हर छोटा बदलाव बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है।