भारत में डायरेक्ट सेलिंग का सैकड़ों सालों से चल रहा है और आज भी चालू है हमारी जानकारी के अनुसार डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्क मार्केटिंग का आधुनिक स्ट्रक्चर भारत में करीब वर्ष 1980 में शुरू हुआ था जिसमें कुछ बड़े अंतरराष्ट्रीय लोग 90 के दशक में भारतीय मार्केट में आए थे इसके बाद धीरे-धीरे इंडस्ट्री बढ़ती रही और साथ ही कई तरह के अवैध पिरामिड स्कीम इस बीच इंडस्ट्री का लाभ पाने के लिए खरपतवार की तरह उभरती गई जिससे इंडस्ट्री का नाम खराब हुआ जिसे देखते हुए पिछले कुछ सालों में बहुत सी इंडस्ट्री बॉडी और सरकारी एजेंसियों ने मिलकर एक सकारात्मक माहौल पैदा करने की और एक मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने की कोशिश की ताकि भारत में इस इंडस्ट्री को अपार सफलता मिले FICCI इस संदर्भ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और इस इंडस्ट्री से संबंधित कई रिपोर्ट्स फिक्की की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है
सरकार ने वर्ष 2016 में डायरेक्ट सेलिंग को लेकर गाइडलाइन्स जारी की और तब से इंडस्ट्री को काफी फायदा हुआ है फिक्की और केपीएमजी के हाल फिलहाल की रिपोर्ट से पता चलता है कि डायरेक्ट सेलिंग में रिटेल सेल्स वर्ष 2025 तक करीब 64500 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी और इससे करीब 1.8 करोड़ भारतीयों को रोजगार भी मिलेगा जिसमें माना जा रहा है कि 60 प्रतिशत महिलाएं होगी
भारत में नेटवर्क मार्केटिंग इंडस्ट्री का स्वर्ण युग अभी शुरू हुआ है और इसमें सभी लोगों के लिए काफी अवसर हैं और भविष्य में भी बेरोजगारी की समस्या को काफी हद तक डायरेक्ट सेलिंग के जरिए कंट्रोल किया जा सकेगा
