भारत में डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री की ग्रोथ बेहतर है और वित्त वर्ष 2019-20 तक इस इंडस्ट्री के 3.4 करोड़ डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। ग्रोथ की इस संभावना को देखते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने भारत में डायरेक्ट सेलिंग के रेग्यूलेशन के लिए एक व्हाइटपेपर जारी करते हुए कहा है कि देश में मौजूदा रेग्यूलेटरी अनिश्चितता को खत्म करने के लिए एक सेंट्रलाइज्ड रेग्यूलेटरी मेकानिज्म की स्थापना की जरूरत है।
क्या है सुझाव
भारत सरकार के पूर्व लॉ सेक्रेटरी केएन चतुर्वेदी द्वारा तैयार ड्राफ्ट बिल के इनपुट के आधार पर तैयार इस व्हाइटपेपर में सुझाव दिया गया है कि जिस तरह से सभी तरह के इन्वेस्टमेंट के लिए सेबी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है उसी तरह डायरेक्ट सेलिंग के लिए भी देश में संचालित सभी डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों के लिए भी अनिवार्य रजिस्ट्रेशन प्रोसेस शुरू की जाए। डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री में कंपनियों का रजिस्ट्रेशन प्रस्तावित सेंट्रल रेग्यूलेटरी बॉडी द्वारा ही किया जाना चाहिए।
डायरेक्ट सेलिंग को परिभाषित करने की जरूरत
आईआईसीए के व्हाइटपेपर में कहा गया है कि देश में डायरेक्ट सेलिंग को स्पष्ट परिभाषित करने की तुरंत आवश्यकता है, जिससे कानूनी रूप से डायरेक्ट सेलिंग और पोंजी व पिरामिड स्कीमों के बीच आसानी से स्पष्ट अंतर किया जा सके। इस अंतर से डायरेक्ट सेलर्स और कंज्यूमर्स दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
1980 से हुई शुरुआत
भारत में मॉडर्न डायरेक्ट सेलिंग की शुरुआत 1980 में स्मॉल इंडियन कंपनी यूरेका फोर्ब्स ने की थी। इसने अपने वैक्यूम क्लीनर्स की घर-घर बिक्री करने के लिए डायरेक्ट सेलर्स की भर्ती की थी। इसके बाद 90 के दशक में इंटरनेशनल कंपनियों जैसे एमवे और एवन के प्रवेश करने के बाद यह इंडस्ट्री बहुत तेजी से विकसित हुई। भारत में, डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री प्रमुख तौर पर हेल्थ और वेलनेस प्रोडक्ट्स, कॉस्मेटिक्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, वाटर प्यूरीफायर्स और लाइफ इंश्योरेंस की बिक्री का एक डिस्ट्रीब्यूशन चैनल है।
ग्रोथ की है बहुत संभावना
आईआईसीए के व्हाइटपेपर में कहा गया है कि भारत में बढ़ते मध्यम वर्ग और खर्च योग्य आय में वृद्धि होने से भविष्य में डायरेक्ट सेलिंग उत्पादों की मांग बहुत अधिक बढ़ेगी, यदि यहां उचित रेग्यूलेटरी सिस्टम हो तो डायरेक्ट सेलिंग का भविष्य बहुत उज्जवल होगा। 2013 तक डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री में भारत में 9.63 करोड़ लोगों को स्वयं रोजगार मिला हुआ है। दुनियाभर में डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री का आकार 185 अरब डॉलर का है। भारत में डायरेक्ट सेलिंग में मिले कुल रोजगार में 58.3 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं की है।